उम्मीद – एक बेहतर ज़िन्दगी की

“ सरमन कुमार-एक प्रवासी मजदूर हिमाचल के,काँगड़ा जिले के शाहपुर में एक नई व अच्छी कमाई की उमीद के साथ रोजाना कड़ी धुप में सुबह से शाम तक ग्राहक के आने की आस में रेडी लेकर खड़े"

सरमन कुमार-एक प्रवासी मजदूर हिमाचल के,काँगड़ा जिले के शाहपुर में एक नई व अच्छी कमाई की उमीद के साथ रोजाना कड़ी धुप में सुबह से शाम तक अपनी रेडी लेकर खड़े, ग्राहक को आता देख मन ही मन में कमाई की एक नई उमीद

By:- Kusum Sharma

हर शहर हर कस्बे हर घर की अपने आप में ही अलग-अलग कहानी होती है |  ऐसे ही एक कहानी मध्यप्रदेश के ग्वार्लियर के रहने बाले एक परिवार की है जो कि अपने घर से बहुत दूर हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले के शाहपुर में रहते है | घर में पैसे की कमी के कारण पढाई में लग्न होने के बाद भी बारवी के बाद कॉलेज की पढाई पूरी नही कर पाए और सरमन को गोल्ग्पे का कार्य आरम्भ करना पड़ा |

सरमन की छोटी सी रेडी पर पानी पूरी का आनद लेते ग्राहक, जो सरमन के रोजगार व घर के खर्चे का एक मात्र सहारा ”

शाहपुर (काँगड़ा) हिमाचल प्रदेश में सरमन की छोटी सी रेडी पर पानी पूरी का आनद लेते ग्राहक, जो सरमन के रोजगार व घर के खर्चे का एक मात्र सहारा

सरमन ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में अपना कार्य मध्यप्रदेश से ही आरभ किया था | कार्य अच्छे से ना चलने के करण अपने घर से दूर पंजाब चले गये | पंजाब में 2 वर्ष तक कार्य किया लेकिन इन दो वर्ष में उन्हें बहुत सी मुश्किलों का सामना का करना पड़ा | सरमन का कहना है की पंजाब में लोगो का व्यवहार उनके साथ सही नही था इसलिए पंजाब से आकर हिमाचल प्रदेश में अपना कार्य करना शुरू किया और पिछले 3 वर्षो से हिमाचल प्रदेश में छोटी सी रेडी लगा कर अपने घर परिवार का खर्चा चला रहे है | इस रेडी से मुश्किल से घर का खर्चा निकल पाता है|

 

“सारा दिन कड़ी धुप में खड़े हो कर गोल्ग्पे बेचने के बाद सुबह 5 बजे उठ कर एक नई उमीद के साथ फिर से अपना कार्य शुरू करते हुए ”

सारा दिन  कड़ी धुप में खड़े हो कर गोल्ग्पे बेचने के बाद सुबह 5 बजे उठ कर एक नई उमीद के साथ फिर से अपना कार्य शुरू करते हुए

सरमन शाहपुर में अपनी पत्नी और दो बच्चो के साथ रहता है | गीता जो की सरमन की पत्नी है वह मात्र 19 वर्ष की थी जब उनकी शादी हो गयी थी | गीता हर दिन घर का काम करने के साथ-साथ सुबह 5 बजे उठ कर अपने पति के साथ गोल्ग्पे बनाने का कार्य भी करती है | इनके पास रहने के लिए दो छोटे-छोटे से कमरे और एक रसोईघर है |

 

गर्मी के मौसम में बिना पंखे में सोये छोटे बच्चे

बीना पंखे के सोये बच्चो की हालत समझना नामुमकिन, घर के हालत अच्छे ना होने के बाबजूद भी बच्चो को अच्छी शिक्षा देना ही ही माता पिता का सपना

गर्मी भरे इस मौसम में बिना पंखे के सोये इन बच्चो की हालत को कोई नही समझ सकता पर शायद गरीबी की यह मार बच्चे भी समझ चुके है | सरमन और गीता के बड़े बेटे हर्ष की उम्र केवल 5 वर्ष और छोटे बेटे की उम्र केवल 2 वर्ष है | हर्ष अभी पहली कक्षा में पढ़ रहा है | हर्ष के पिता घर के हालात अच्छे ना होने के कारण अपनी पढाई पूरी नही कर पाए पर अब अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देना चाहते है |

 

“घर में बाथरूम नहीं , खुले में ही बच्चे को नहलाना एक मजबूरी ”

सर्दी हो या गर्मी घर के काम और पति का हाथ बटाने के साथ-साथ घर में वाथ्रूमण ना होने के बावजूद घर के बाहर लगे नलके से ही बच्चे को नहला कर रोजाना स्कूल के लिए तैयार करना |

घर के हालातो से मजबूर पिता की हालत को छोटा सा बच्चा भी समझ गया और पिता को कार्य करता देख वो मासूम अपने हाथो को नही रोक पाया ”

अपने काम के करण बच्चो के लिए भी समय नही निकाल पाते यह बात उनका छोटा सा बच्चा भी समझ गया और पिता को कार्य करता देख वो मासूम अपने हाथो को नही रोक पाया

सरमन अपनी पत्नी के साथ मिलकर रोजाना सुबह 5 बजे उठ कर गोल्ग्पे, चाटपपड़ी, टिकी बनाने के बाद 10 से 11 बजे के बिच अपनी रेडी लेकर शाहपुर चले जाते और रात को 9 बजे के बाद घर लोटते | कभी-कभी बिक्री भी सही से नही हो पाती | परन्तु गरीबी की यह मार वही समझ सकता है जो सरमन की तरह इस गरीबी से गुजरा हो | सरमन का अपने बच्चो के लिए भी समय निकलना मुश्किल हो जाता है परन्तु सरमन का छोटा बेटा विहान जो की केवल 2 वर्ष का है वह भी यह बात समझ गया है | पिता को कार्य करता देख वह मासुम भी अपने हाथो को नही रोक पाता |

[Text and Photographs are by Kusum Sharma. She is a second-semester student at the Department of Journalism & Creative Writing, Central University of Himachal Pradesh.]

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